आज हम इस पोस्ट में Ab to bas ek hi dhun hai naat lyrics – padhe aur mehsus kare पर बात करेंगे। ये नात दिल को गहराई से छू लेने वाली है और हर लफ्ज़ आपके दिल में बसेगा। अभी पढ़ें और इस रूहानी एहसास का लुत्फ उठाएं, जो आपको सुकून और barkat से भर देगा।
Ab To Bas Ek Hi Dhun Hai Naat Lyrics हिंदी में
अब तो बस एक ही धुन है कि मदीना देखूँ
अब तो बस एक ही धुन है कि मदीना देखूँ
आख़री उम्र में क्या रौनक़-ए-दुनिया देखूँ
अब तो बस एक ही धुन है कि मदीना देखूँ
आख़री वक़्त में क्या रौनक़-ए-दुनिया देखूँ
अब तो बस एक ही धुन है कि मदीना देखूँ
अज़-उफ़क़ ता-ब-उफ़क़ एक ही जल्वा देखूँ
जिस तरफ़ आँख उठे रौज़ा-ए-वाला देखूँ
‘आक़िबत मेरी सँवर जाए जो तयबा देखूँ
दस्त-ए-इमरोज़ में आईना-ए-फ़र्दा देखूँ
मैं कहाँ हूँ, ये समझ लूँ तो उठाऊँ नज़रें
दिल सँभल जाए तो मैं जानिब-ए-ख़ज़रा देखूँ
मैं कहाँ हूँ, ये समझ लूँ तो उठाऊँ नज़रें
दिल जो सँभले तो मैं फिर गुंबद-ए-ख़ज़रा देखूँ
मैं ने जिन आँखों से देखा है कभी शहर-ए-नबी
और इन आँखों से अब क्या कोई जल्वा देखूँ
बा’द-ए-रेहलत भी जो सरकार को महबूब रहा
अब इन आँखों से मैं ख़ुश-बख़्त वो हुजरा देखूँ
जालियाँ देखूँ कि दीवार-ओ-दर-ओ-बाम-ए-हरम
अपनी मा’ज़ूर निगाहों से मैं क्या-क्या देखूँ
मेरे मौला ! मेरी आँखें मुझे वापस कर दे
ता-कि इस बार मैं जी भर के मदीना देखूँ
जिन गली कूचों से गुज़रे हैं कभी मेरे हुज़ूर
उन में ता-हद्द-ए-नज़र नक़्श-ए-कफ़-ए-पा देखूँ
ता-कि आँखों का भी एहसान उठाना न पड़े
क़ल्ब ख़ुद आईना बन जाए, मैं इतना देखूँ
काश, इक़बाल ! यूँही ‘उम्र बसर हो मेरी
सुब्ह का’बे में हो और शाम को तयबा देखूँ
अब तो बस एक ही धुन है कि मदीना देखूँ
अब तो बस एक ही धुन है कि मदीना देखूँ
मेरे मौला ! मेरी आँखें मुझे वापस कर दे
ता-कि इस बार मैं जी भर के मदीना देखूँ
अब तो बस एक ही धुन है कि मदीना देखूँ
जाऊँ मैं शहर-ए-नबी गुंबद-ए-ख़ज़रा देखूँ
और फिर क़ब्र-ए-हसन, तुर्बत-ए-ज़हरा देखूँ
अब तो बस एक ही धुन है कि मदीना देखूँ
ढूँड लूँ अपने गुनाहों की मु’आफ़ी की सबील
रहमत-ए-रहमत-ए-कौनैन का जल्वा देखूँ
अब तो बस एक ही धुन है कि मदीना देखूँ
वाँ से फिर जा के नजफ़ ज़ख़्म दिखाऊँ अपने
और नज़दीक से ही अपना मसीहा देखूँ
अब तो बस एक ही धुन है कि मदीना देखूँ
फिर शहंशाह-ए-नजफ़ से मैं इजाज़त ले कर
कर्बला जा के मैं शब्बीर का रौज़ा देखूँ
अब तो बस एक ही धुन है कि मदीना देखूँ
अश्क बरसाऊँ ग़म-आल-ए-मुहम्मद पे वहाँ
अपनी तारीक निगाहों में सवेरा देखूँ
अब तो बस एक ही धुन है कि मदीना देखूँ
बस इसी बात पे जीता हूँ, हमीद-ओ-‘अब्दाल !
इन तमन्नाओं को पूरा कभी होता देखूँ
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Ab To Bas Ek Hi Dhun Hai Naat Lyrics English
b To Bas Ek Hi Dhun Hai Ke Medina Dekhun
Ab to bas ek hi dhun hai ke Medina dekhun
Aakhri umr mein kya raunak-e-duniya dekhun
Ab to bas ek hi dhun hai ke Medina dekhun
Aakhri waqt mein kya raunak-e-duniya dekhun
Ab to bas ek hi dhun hai ke Medina dekhun
Az-Ufak ta-B-Ufak ek hi jalwa dekhun
Jis taraf aankh uthe Roza-e-Wala dekhun
Aaqibat meri sanwar jaye jo Tayba dekhun
Dast-e-Imroz mein aaina-e-Farda dekhun
Main kahan hoon, ye samajh loon to uthaoon nazrein
Dil sambhal jaye to main janib-e-Khazra dekhun
Main kahan hoon, ye samajh loon to uthaoon nazrein
Dil jo sambhale to main phir Gumbad-e-Khazra dekhun
Main ne jin aankhon se dekha hai kabhi Sheher-e-Nabi
Aur in aankhon se ab kya koi jalwa dekhun
Ba’ad-e-Rehalat bhi jo Sarkar ko Mahboob raha
Ab in aankhon se main khush-bakht wo Hujra dekhun
Jaliyan dekhun ke deewar-o-dar-o-Bam-e-Haram
Apni ma’zoor nigahon se main kya-kya dekhun
Mere Maula! Meri aankhein mujhe wapas kar de
Ta-ke is baar main ji bhar ke Medina dekhun
Jin gali kuchon se guzre hain kabhi mere Huzoor
Un mein ta-hadd-e-nazar naqsh-e-Kaf-e-Pa dekhun
Ta-ke aankhon ka bhi ehsaaan uthana na pade
Qalb khud aaina ban jaye, main itna dekhun
Kaash, Iqbal! Yunhi umr basar ho meri
Subah Ka’abe mein ho aur shaam ko Tayba dekhun
Ab to bas ek hi dhun hai ke Medina dekhun
Ab to bas ek hi dhun hai ke Medina dekhun
Mere Maula! Meri aankhein mujhe wapas kar de
Ta-ke is baar main ji bhar ke Medina dekhun
Ab to bas ek hi dhun hai ke Medina dekhun
Jaun main Sheher-e-Nabi Gumbad-e-Khazra dekhun
Aur phir Qabr-e-Hassan, Turbat-e-Zahra dekhun
Ab to bas ek hi dhun hai ke Medina dekhun
Dhoond loon apne gunahon ki mu’afi ki sabil
Rehmat-e-Rehmat-e-Kainat ka jalwa dekhun
Ab to bas ek hi dhun hai ke Medina dekhun
Wahan se phir ja ke Najaf zakhm dikhau apne
Aur nazdeek se hi apna Masiha dekhun
Ab to bas ek hi dhun hai ke Medina dekhun
Phir Shahanshah-e-Najaf se main ijazat le kar
Karbala ja ke main Shabbir ka Roza dekhun
Ab to bas ek hi dhun hai ke Medina dekhun
Ashk barsaun gham-e-Aal-e-Muhammad pe wahan
Apni tareekh nigahon mein savera dekhun
Ab to bas ek hi dhun hai ke Medina dekhun
Bas isi baat pe jeeta hoon, Hamid-o-‘Abdal!
In tamannaon ko poora kabhi hota dekhun
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Ab To Bas Ek Hi Dhun Hai Naat Lyrics एक बहुत प्यारी नात है, जिसे मशहूर नातख्वां Owais Raza Qadri ने पढ़ा है। इस नात में इंसान अपने दिल की ख्वाहिश का इज़हार करता है कि वो मदीना शरीफ को देखना चाहता है। हर लफ्ज़ बहुत दिल छू लेने वाला और आसान है, ताकि हर कोई इसे समझ सके। यह नात हमे मदीना की याद दिलाती है और वहां जाने की दुआ करने का पैगाम देती है।
Owais Raza Qadri ने इस नात को बड़े खूबसूरत अंदाज़ में पेश किया है, जो हर शख्स के दिल को छू लेती है।
हमें पूरा यकीन है कि इस पोस्ट को पढ़कर आप Ab to bas ek hi dhun hai naat lyrics – padhe aur mehsus kiya hoga के अल्फाज़ को दिल से महसूस करेंगे। और भी रूहानी नातों के लिए हमारी वेबसाइट पर जुड़े रहें।
Ab To Bas Ek Hi Dhun Hai Naat Lyrics से जुरे सवाल
Ab To Bas Ek Hi Dhun Hai Naat Lyrics किसने लिखी है?
Ab to bas ek hi dhun hai naat को मशहूर नातख्वां Owais Raza Qadri ने पेश किया है। यह नात मदीना शरीफ की ख्वाहिश और इश्क़ को बयान करती है, जो सुनने वाले के दिल को छू जाती है।
Ab To Bas Ek Hi Dhun Hai Naat Lyrics किस बारे में है?
यह नात मदीना शरीफ जाने की ख्वाहिश को बयान करती है, जहाँ एक शख्स अपने दिल की गहरी तमन्ना ज़ाहिर करता है कि वह मदीना की ज़ियारत कर सके और सुकून पा सके।
Ab To Bas Ek Hi Dhun Hai Naat में कौन से खास अल्फाज़ इस्तेमाल हुए हैं?
इस नात में मदीना देखूं, मेरे मौला, और इश्क़ जैसे अल्फाज़ का इस्तेमाल हुआ है, जो इश्क़ और जुस्तजू को बखूबी बयान करते हैं। इन लफ्ज़ों में सुकून और पाकीज़गी का एहसास होता है।
Ab To Bas Ek Hi Dhun Hai Naats को कहाँ सुन सकते हैं?
आप इस नात को यूट्यूब और इस्लामिक वेबसाइट्स पर सुन सकते हैं। इसे सुनकर मदीना की पाकीज़ धरती की याद और उससे जुड़ने का एहसास किया जा सकता है।
Ab To Bas Ek Hi Dhun Hai Naat Lyrics के अल्फाज़ क्यों खास हैं?
इस नात के अल्फाज़ दिल से निकले हुए महसूस होते हैं, जो एक सच्ची चाहत और मदीना शरीफ की याद को दर्शाते हैं। हर शख्स इस नात को सुनकर दिल की गहराई से जुड़ेगा।