DIL ME ISHQE NABI KI HO AISI LAGAN NAAT LYRICS|Allama Saim

ये  Dil Me Ishq e Nabi Ki Ho Aisi Lagan Naat Lyrics आपके दिल को सुकून देने के लिए है, जिसे हमने हिंदी और अंग्रेजी में पेश किया है। कृपया Dil Me Ishq e Nabi Ki Ho Aisi Lagan Naat Lyricss को ध्यान से पढ़ें, क्योंकि ये शब्द आपको आराम देंगे।

Dil Me Ishqe Nabi ki Ho Aisi Lagan Naat का तारुफ़:
नात ‘दिल में इश्क-ए-नबी की हो ऐसी लगन’ इस्लामी मोहब्बत और अक़ीदत की बेहतरीन मिसाल है। यह नात आशिक़-ए-रसूल ﷺ के दिलों में नबी ﷺ के लिए गहरी मोहब्बत जगाती है।

Dil Me Ishqe Nabi ki Ho Aisi Lagan  Naat को लिखने वाले:
इस नात को मशहूर शायर Allama Saim Chishti ने लिखा है। उनके अल्फाज़ में नबी ﷺ के लिए गहरी मोहब्बत और एहतराम को बेहतरीन तरीके से बयान किया गया है।

Dil Me Ishqe Nabi ki Ho Aisi Lagan Naat की अहमियत:
यह नात मुसलमानों के दिलों में नबी ﷺ के लिए मोहब्बत और अक़ीदत का नया जोश भरती है। यह लोगों को नबी ﷺ की मोहब्बत में डूबने के लिए राग़िब करती है।

Dil Me Ishqe Nabi ki Ho Aisi Lagan Naat गाने वाले कलाकार:
इस नात को मशहूर नातख़्वां क़ारी वहीद ज़फ़र क़ासमी ने अपनी दिल को छू लेने वाली आवाज़ में गाया है, जिससे यह नात बेहद मक़बूल हो गई है और लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बना चुकी है।

Dil Me Ishqe Nabi ki Ho Aisi Lagan Naat Lyrics Hindi 

Dil Me Ishq e Nabi Ki Ho Aisi Lagan Naat Lyrics hindi

दिल में इश्क़-ए-नबी की हो ऐसी लगन,
रूह तरपती रहे दिल मचलता रहे।
जिंदगी का मज़ा है कि हर सांस से
या मुहम्मद मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) निकलता रहे।

दिल में इश्क-ए-नबी की हो ऐसी लगन,
या मुहम्मद मुहम्मद में कहता रहा।
नूर के मोतीयों की लड़ी बन गई,
आयातों से मिलाता रहा आयतें।

फिर जो देखा तो नात-ए-नबी बन गए।
जो भी आंसू बहें मेरे महबूब के,
सब के सब अब्र-ए-रहमत के छींटे बन गए।
चाह गई रात जब ज़ुल्फ़ लहराई,

जब तबसुम किया चाँदनी बन गई।
ये तो माना कि जन्नत है बाग़-ए-हसीन,
खूबसूरत है सब खुल्द की सर ज़मीन।
हुस्न-ए-जन्नत को फिर जब समेटा गया,

सरवर-ए-अंबिया की गली बन गई।
जब चिराग़ तज़किरा उनके रुखसार का,
वदुहा पर लिया, वल क़मर कह दिया।
सूरतों की तिलावत भी होती रही,

नात भी हो गई बात भी बन गई।
सब से साइम ज़माने में मज़ूर था,
सब से बेइक़ास था, बेबस था, मजबूर था।
उनको रहम आ गया मेरे हालात पर,

मेरी इज़्ज़त, मेरी बेबसी बन गई।
दिल में इश्क़-ए-नबी की हो ऐसी लगन,
रूह तरपती रहे दिल मचलता रहे।
जिंदगी का मज़ा है कि हर सांस से,
या मुहम्मद मुहम्मद निकलता रहे।

Dil Me Ishqe Nabi ki Ho Aisi Lagan Naat Lyrics नात के शब्दों और उनके अर्थ

  1. इश्क़:
    मोहब्बत या इश्क़ का एक गहरा और भावुक रूप, जो नबी के लिए इंसान के दिल में होता है।
  2. नबी:
    पैगंबर, खास तौर पर पैगंबर मोहम्मद, जो मुसलमानों के लिए सबसे बड़ा मिसाल हैं।
  3. लगन:
    पुख़्तगी या उत्सुकता, यहाँ यह नबी के लिए लाज़वाल मोहब्बत और कुर्बानी को ज़ाहिर करता है।
  4. रूह:
    जान या जिंदगी, जिसका तरसना यहाँ नबी की याद और उनकी मोहब्बत में भटकने का इशारा है।
  5. तरपती:
    तड़पना या बेचैन होना, यह उस गहरी अहसास को बयां करता है जो नबी की याद में महसूस होता है।
  6. दिल:
    अहसासात और मोहब्बत का केंद्र, यहाँ यह नबी के लिए गहरे ज़ज्बाती तालुक को ज़ाहिर करता है।
  7. सांस:
    जिंदगी की निशानी, जो नबी की याद में हर सांस के साथ उन्हें याद करने का इशारा देती है।
  8. मुहम्मद:
    आखिरी पैगंबर का नाम, जिनकी याद में नात लिखी गई है और जो मुसलमानों के लिए तर्ज़ीब का ज़रिया हैं।
  9. नूर:
    रोशनी या चमक, जो नबी की शान और उनकी शख्सियत को ज़ाहिर करता है। यह उनके इर्द-गिर्द की इलाहीयत का अलामत है।
  10. आंसू:
    ग़म या अहसासात का इज़हार, यहाँ यह नबी के लिए मोहब्बत और अकीदत का अलामत हैं, जो उनकी याद में बहते हैं।

Dil Me Ishqe Nabi ki Ho Aisi Lagan Naat Lyrics English

Dil mein ishq-e-Nabi ki ho aisi lagan,
Rooh tarapti rahe dil machalta rahe.
Zindagi ka maza hai kay har saans se
Ya Muhammad Muhammad (Sallallaho Alayhi Wasallam) nikalta rahey.

Dil Mein Ishq-e-Nabi Kee Ho Aesee Lagan,
Ya Muhammad Muhammad mein kehta raha.
Noor kay motiyo ki lare ban gaee,
Ayaton sey milata raha ayatein.

Phir jo dekha to Naat e Nabi ban gaye.
Jo bhi ansoo bahe merey Mehboob kay,
Sab key sab abr e rehmat kay cheentay banay.
Chah gaee raat jab zulf lehra gaee,

Jab tabasum kiya chandani ban gaee.
Yeh to maana kay jannat hai bagh e haseen,
Khoobsoorat hey sab khuld ki sar zameen.
Husn e jannat ko phir jab samayta gaya,

Sarwar e ambiya ki galee ban gaee.
Jab chirah tazkira un kay rukhsaar ka,
Waduha par liya, wal qamar keh dia.
Sooraton kee tilawat bhi hoti rahi,

Naat bhi ho gayi baat bhi ban gayi.
Sab say saim zamanay main mazoor tha,
Sab sey beykas tha beybas tha majboor tha.
Un ko reham agaya merey halaat par,

Meree azmat meree beybasee ban gaee.
Dil mein ishq e Nabi ki ho aisi lagan,
Rooh tarapti rahay dil machalta rahay.
Zindagi ka maza hai kay har saans say,
Ya Muhammad Muhammad nikalta rahey.


Dil Me Ishqe Nabi ki Ho Aisi Lagan Naat Lyrics Urdu

Dil Me Ishq e Nabi Ki Ho Aisi Lagan Naat Lyrics Urdu

دل میں عشقِ نبی کی ہو ایسی لگن،
روح تڑپتی رہے دل مچلتا رہے۔
زندگی کا مزہ ہے کہ ہر سانس سے
یا محمد محمد (صلی اللہ علیہ وآلہ وسلم) نکلتا رہے۔

دل میں عشقِ نبی کی ہو ایسی لگن،
یا محمد محمد میں کہتا رہا۔
نور کے موتیوں کی لڑی بن گئی،
آیاتوں سے ملاتا رہا آیاتیں۔

پھر جو دیکھا تو نعتِ نبی بن گئے۔
جو بھی آنسو بہے میرے محبوب کے،
سب کے سب ابرِ رحمت کے چھینٹے بن گئے۔
چاہ گئی رات جب زلف لہرا گئی،

جب تبسم کیا چاندنی بن گئی۔
یہ تو مانا کہ جنت ہے باغِ حسین،
خوبصورت ہے سب خلد کی سرزمین۔
حسنِ جنت کو پھر جب سمیٹا گیا،

سردارِ انبیاء کی گلی بن گئی۔
جب چراغ تذکرہ ان کے رخسار کا،
وَدُحَا پر لیا، وَالقمر کہہ دیا۔
صورتوں کی تلاوت بھی ہوتی رہی،

نعت بھی ہو گئی بات بھی بن گئی۔
سب سے سائم زمانے میں مجبور تھا،
سب سے بےکاس تھا بےبس تھا، مجبور تھا۔
ان کو رحم آ گیا میرے حالات پر،

میری عظمت میری بےبسی بن گئی۔
دل میں عشقِ نبی کی ہو ایسی لگن،
روح تڑپتی رہے دل مچلتا رہے۔
زندگی کا مزہ ہے کہ ہر سانس سے،
یا محمد محمد نکلتا رہے۔

यह नात अल्लामा साइम चिश्ती ने लिखी है, जो उर्दू शायरी के मशहूर शायरों में से एक हैं। उनकी तख्लीकात आम तौर पर नबी ﷺ के लिए गहरे इश्क और अकीदत का इज़हार करती हैं।

जज़्बाती गहराई:
यह नात नबी ﷺ के लिए मोहब्बत और अकीदत की गहराई को बयान करती है। इसके अल्फाज़ दिल की गहराइयों से निकलते हैं, जिस से सुनने वाला मुतासिर होता है।

मशहूरी:
“दिल में इश्क़-ए-नबी की हो ऐसी लगन” नात को कई मशहूर नातख़्वान जैसे मुहम्मद मिलाद रजा कादरी और मरियम अली ने गाया है। उनकी आवाज़ में यह नात और भी ज़्यादा असरअंगेज़ हो जाती है।

रूहानी अहमियत:
इस नात का एक खास रूहानी अहमियत है। इसे पढ़ने या सुनने से इंसान अपने अंदर नबी ﷺ के लिए मोहब्बत और अकीदत का एहसास करता है, जो उसे जिंदगी में पॉज़िटिव सिम्त में आगे बढ़ने के लिए तरग़ीब देता है।

इज्तिमाई एहसास:
यह नात मुसलमानों के बीच इत्तेहाद और इज्तिमाई जज़्बे को बढ़ाती है। जब इसे इज्तिमाई तौर पर पढ़ा या सुना जाता है, तो यह सबको एक ही एहसास में बांधती है और एकजुटता का एहसास दिलाती है।

नतीजा:
“दिल में इश्क़-ए-नबी की हो ऐसी लगन” नात न सिर्फ एक शायरी तख्लीक है, बल्कि यह नबी ﷺ के लिए गहरे इश्क और अकीदत का एक शानदार नमूना है।

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