Karbala Teri Kismat Pe Lakhon Salam lyrics से आपको कर्बला की कहानी और का पता चलता है। यह नात हमें कर्बला के बारे में बताता है| और इसके शब्द दिल को बहुत अच्छे लगते हैं। जब आप इसे पढेंगे, तो आपको अच्छा लगेगा और आप इसे पसंद करेंगे। अभी सुनें और इस खूबसूरत नात को।
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Karbala Teri Kismat Pe Lakhon Salam Lyrics हिंदी में
जिनकी माँ फ़ातिमा और हैं नाना रसूल
कितनी पाकीज़ा है उनके क़दमों की धूल।
मरहबा, मरहबा, वो हैं आले रसूल,
कितने महके हुए हैं मदीने के फूल,
कर्बला तेरी क़िस्मत पे लाखों सलाम।
कितनी अर्फ़ा है शाने हबीबे ख़ुदा,
मालिके दो सरा, सरवरे अंबिया।
मुक़्तदी जिस के सब, सब का जो मुक़्तदा,
जिसके ज़ेरे लिवा आदम ओ मंसीवा,
उस सज़ा-ए-स्यादत पे लाखों सलाम।
डूबा सूरज, किसी ने भी फेरा नहीं,
कोई मिस्ले यादुल्लाह भी देखा नहीं।
जिसकी ताक़त का कोई ठिकाना नहीं,
जिसको बा-रे दो आलम की परवाह नहीं,
ऐसे बाज़ू की क़ुव्वत पे लाखों सलाम।
कमली वाले की जिसको रफ़ाक़त मिली,
सब सहाबा की जिसको इमामत मिली।
सबसे पहले जिसे है ख़िलाफ़त मिली,
बाद नबियों के जिसको है इज़्ज़त मिली,
उसके ताज-ए-ख़िलाफ़त पे लाखों सलाम।
दीन ओ दुनिया दिये, माल और ज़र दिया,
हूर ओ ग़िलमान दिये, ख़ुल्द ओ कौसर दिया।
दामन-ए-मक़सद-ए-ज़िंदगी भर दिया,
हाथ जिस सम्त उठा, ग़नी कर दिया,
मौज-ए-बेहर-ए-सखावत पे लाखों सलाम।
जिनकी अज़मत पे सद्के वक़ार-ए-हरम,
जिनकी ज़ुल्फ़ों पे सद्के बहार-ए-हरम।
नौ-शा-ए-बज़्म-ए-परवर-दिगार-ए-हरम,
शहरे यार-ए-इरम, ताजदार-ए-हरम,
नौ बहार-ए-शफ़ाअत पे लाखों सलाम।
जिनके चेहरे पे जल्वों का पहरा रहा,
नज्म ओ ताहा के झुरमुट में चेहरा रहा।
हुस्न जिसका हर एक शब में गहरा रहा,
जिसके माथे शफ़ाअत का सेहरा रहा,
उस जबीं-ए-सआदत पे लाखों सलाम।
ला-मकां की ज़मीन, बेहरे-काबा झुकी,
रिफ़अत-ए-मंजिल-ए-अर्श-ए-आला झुकी।
अज़मत-ए-क़िब्ला-ए-दीन ओ दुनिया झुकी,
जिनके सजदे को मेहराब-ए-काबा झुकी,
उन भौवें की लताफ़त पे लाखों सलाम।
पड़ गई जिस पे महशर में बख़्शा गया,
देखा जिस सम्त अब्र-ए-करम छा गया।
रुख़ जिधर हो गया, ज़िंदगी पा गया,
जिस तरफ़ उठ गई दम में दम आ गया,
उस निगाह-ए-इनायत पे लाखों सलाम।
जिसके जल्वे ज़माने पे छाने लगे,
जिसकी ज़ौ से अंधेरे ठिकाने लगे।
जिससे ज़ुल्मत-कदे नूर पाने लगे,
जिससे तारीक दिल जगमगाने लगे,
उस चमक वाली रंगत पे लाखों सलाम।
कुल-जुमला-ए-हुस्न की जिनको शाख़ें कहें,
जिनसे सोते लताफ़त के फूटें करें।
जिनसे नहर-ए-तजल्ली की जारी रहें,
नूर के चश्मे लहरायें, दरिया बहें,
उन उंगलियों की करामत पे लाखों सलाम।
काबा-ए-दीन ओ दिन यानी नक्श-ए-क़दम,
जिनकी अज़मत नहीं अर्श-ए-आज़म से कम।
हर बुलंदी का सर हो गया जिस पे ख़म,
खाई कुरआन ने खाके-गुज़र की क़सम,
उस क़दाम-ए-क़दम पे लाखों सलाम।
मैं भी हूँ एक गदा-ए-दार-ए-अौलिया,
मैं भी हूँ एक सगे-कू-ए-गौसुल वरा।
मैं भी हूँ ज़र्रा-ए-कूचा-ए-मुस्तफा,
तेरे उन दोस्तों के तुफ़ैल ख़ुदा,
बंदाए नंगे ख़िलक़त पे लाखों सलाम।
अब्र-ए-जूद ओ अताअ किस पे बरसा नहीं,
तेरा लुत्फ़ ओ करम किस पे देखा नहीं।
किस जगह और कहाँ तेरा जलवा नहीं,
एक मेरा ही रहमत पे दावा नहीं,
शाह की सारी उम्मत पे लाखों सलाम।
आफ़ताब-ए-क़यामत के बदले हों तौर,
जबके हो हर तरफ़ नफ़्सी, नफ़्सी का दौर।
जब किसी को न हो फ़ुर्सत ओ फ़िक्र ओ गौर,
काश महशर में जब उनकी आमद हो और,
भेजें सब उनकी शौकत पे लाखों सलाम।
लेखक आला हजरत
Karbala Teri Kismat Pe Lakhon Salam Lyrics English
Jinki Maa Fatima Aur Hain Naana Rasool
Kitni Paakiza Hai Unke Qadmon Ki Dhool.
Marhaba, Marhaba, Wo Hain Aale Rasool,
Kitne Mehke Hue Hain Madine Ke Phool,
Karbala Teri Qismat Pe Lakhon Salaam.
Kitni Arfa Hai Shaane Habibe Khuda,
Malike Do Sara, Sarware Ambiya.
Muqtadi Jis Ke Sab, Sab Ka Jo Muqtada,
Jiske Zere Liva Adam O Mansiwa,
Us Saza-e-Syaadat Pe Lakhon Salaam.
Dooba Sooraj, Kisi Ne Bhi Phera Nahi,
Koi Misle Yaadullah Bhi Dekha Nahi.
Jiski Taqat Ka Koi Thikana Nahi,
Jisko Baare Do Aalam Ki Parwah Nahi,
Aise Baazu Ki Quwwat Pe Lakhon Salaam.
Kamli Wale Ki Jisko Rafaqat Mili,
Sab Sahaba Ki Jisko Imamat Mili.
Sabse Pehle Jise Hai Khilafat Mili,
Baad Nabioun Ke Jisko Hai Izzat Mili,
Uske Taaj-e-Khilafat Pe Lakhon Salaam.
Deen O Duniya Diye, Maal Aur Zar Diya,
Hoor O Ghilmaan Diye, Khuld O Kauser Diya.
Daaman-e-Maqsad-e-Zindagi Bhar Diya,
Haath Jis Samt Utha, Ghani Kar Diya,
Mauj-e-Behr-e-Sakhawat Pe Lakhon Salaam.
Jinki Azmat Pe Sadqe Waqaar-e-Haram,
Jinki Zulfon Pe Sadqe Bahar-e-Haram.
Nau-Sha-e-Bazm-e-Parwardigaar-e-Haram,
Shehre Yaar-e-Iram, Tajdaar-e-Haram,
Nau Bahar-e-Shafaat Pe Lakhon Salaam.
Jinke Chehre Pe Jalwon Ka Pehra Raha,
Najm O Taha Ke Jhurmut Mein Chehra Raha.
Husn Jiska Har Ek Shab Mein Gahra Raha,
Jiske Maathay Shafaat Ka Sehra Raha,
Us Jabeen-e-Saadat Pe Lakhon Salaam.
La-Makaan Ki Zameen, Behr-e-Kaaba Jhuki,
Rifaat-e-Manzil-e-Arsh-e-Aala Jhuki.
Azmat-e-Qibla-e-Deen O Duniya Jhuki,
Jinke Sajde Ko Mehraab-e-Kaaba Jhuki,
Un Bhawen Ki Lataafat Pe Lakhon Salaam.
Pad Gayi Jis Pe Mahshar Mein Bakhsha Gaya,
Dekha Jis Samt Abr-e-Karam Chha Gaya.
Rukh Jidhar Ho Gaya, Zindagi Pa Gaya,
Jis Taraf Uth Gayi Dam Mein Dam Aa Gaya,
Us Nigaah-e-Inayat Pe Lakhon Salaam.
Jinke Jalwe Zamane Pe Chhane Lage,
Jiski Zau Se Andhere Thikane Lage.
Jisse Zulmat-Kade Noor Pane Lage,
Jisse Tareek Dil Jagmgaane Lage,
Us Chamak Wali Rangat Pe Lakhon Salaam.
Kul-Jumla-e-Husn Ki Jinko Shaakhen Kahein,
Jinse Sote Lataafat Ke Phooten Karein.
Jinse Nahr-e-Tajalli Ki Jaari Rahen,
Noor Ke Chashme Lehraayein, Dariya Bahein,
Ungliyon Ki Karaamat Pe Lakhon Salaam.
Kaaba-e-Deen O Din Yani Naqsh-e-Qadam,
Jinki Azmat Nahi Arsh-e-Azam Se Kam.
Har Bulandi Ka Sar Ho Gaya Jis Pe Kham,
Khaayi Quran Ne Khake-Guzar Ki Qasam,
Us Qadam-e-Qadam Pe Lakhon Salaam.
Main Bhi Hoon Ek Gada-e-Daar-e-Auliya,
Main Bhi Hoon Ek Sage-Koo-e-Ghausul Wara.
Main Bhi Hoon Zarra-e-Koocha-e-Mustafa,
Tere Un Doston Ke Tufail Khuda,
Banda-e-Nange Khilqat Pe Lakhon Salaam.
Abr-e-Jood O Ata Kis Pe Barsa Nahi,
Tera Lutf O Karam Kis Pe Dekha Nahi.
Kis Jagah Aur Kahan Tera Jalwa Nahi,
Ek Mera Hi Rehmat Pe Daawa Nahi,
Shah Ki Saari Ummat Pe Lakhon Salaam.
Aftaab-e-Qayamat Ke Badle Hon Toor,
Jabke Ho Har Taraf Nafsi, Nafsi Ka Daur.
Jab Kisi Ko Na Ho Fursat O Fikr O Ghaur,
Kaash Mahshar Mein Jab Unki Aamad Ho Aur,
Bhejen Sab Unki Shaukat Pe Lakhon Salaam.
isko hindi me likhe same
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हमें यकीन है कि इस नात Karbala Teri Kismat Pe Lakhon Salam ke lyrics को सुनकर आपको गहरी भावनाएं और शांति मिलेगी। इसके लिरिक्स कर्बला की महानता और शहादत को सुंदरता से बयां करते हैं। हमें उम्मीद है कि इस नात ने आपके दिल को छू लिया होगा और आपको एक खास अनुभव दिया होगा। हमारे साथ जुड़ें और ऐसे ही और नात का आनंद लें। islamforall.in
Karbala Teri Kismat Pe Lakhon Salam FAQ
1. सवाल:
कर्बला का वाक़िया किस दिन हुआ था?
जवाब:
कर्बला का वाक़िया 10 मुहर्रम-उल-हराम को हुआ था, जिसे योम-ए-आशूरा के नाम से जाना जाता है। इस दिन हज़रत इमाम हुसैन (र.अ.) और उनके साथियों ने हक़ और इंसाफ़ के लिए अपनी जान की क़ुर्बानी दी थी।
2. सवाल:
कर्बला का वाक़िया क्यों अहम है?
जवाब:
कर्बला का वाक़िया इसलिए अहम है क्योंकि यह हक़ और बातिल (अधर्म) के बीच एक बड़ी जंग थी, जिसमें इमाम हुसैन (र.अ.) ने ज़ुल्म के सामने झुकने के बजाय हक़ के लिए अपनी और अपने अहल-ए-बैत (परिवार) की क़ुर्बानी दी। यह इंसाफ़ और रहमत की मिसाल बन गई।
3. सवाल:
कर्बला की ज़मीन को आला क्यों समझा जाता है?
जवाब:
कर्बला की ज़मीन को आला इसलिए समझा जाता है क्योंकि यह वह मुक़द्दस जगह है जहाँ इमाम हुसैन (र.अ.) और उनके वफ़ादार साथियों ने इस्लाम की हिफ़ाज़त के लिए अपनी जानें कुर्बान कीं। यही कारण है कि इस्लाम में कर्बला को एक ख़ास मक़ाम हासिल है।
4. सवाल:
कर्बला का वाक़िया मुसलमानों के लिए क्या पैग़ाम देता है?
जवाब:
कर्बला का वाक़िया मुसलमानों को यह पैग़ाम देता है कि ज़ुल्म के सामने कभी नहीं झुकना चाहिए, चाहे जान की क़ुर्बानी ही क्यों न देनी पड़े। इमाम हुसैन (र.अ.) ने सब्र, शुजाअत (बहादुरी) और इंसाफ़ का पैग़ाम दिया, जो हर मुसलमान के लिए रौशनी का मंबा है।