Tabligi Jamat ke Kaam

  1. अल्लाह के रास्ते में निकलना (सहाबा की तरतीब पर)।
  2. मसरूफात के साथ वक्त निकालना।
  3. बच्चों को मकतब से जोड़ना।
  4. मस्जिद को 24 घंटे आबाद रखना।
  5. पांच कामों की तरतीब: मशवरा, तालीम, घर-घर जाकर दावत, पड़ोस की मस्जिद पर मेहनत, तीन दिन हर महीने।
  6. 6–13. महाना इज्तिमा, बस्ती से जुड़ाव, घर में दीन के पांच आमाल, इफ्तारी की दावत, खुद से निकलना, दुआओं की एहतिमाम, महीने में निजामी मेहनत।
  7. मस्जिद की जमाअत से माहाना मशवरा और कामकाज़ी ताल्लुक।
  8. पूरी बस्ती के अहबाब को दावत और मेहनत से जोड़ना।
  9. घरों में पाँच आमाल: कुरआन, किताबी तालीम, शिफा, तशकील और मशवरा।
  10. इफ्तारी की दावत देना।
  11. हर साथी खुद से निकलकर काम करे।
  12. दुआओं और अपने आमाल का एहतिमाम।
  13. हर महीने निज़ामी मेहनत में वक्त लगाना।
  14. अपनी ज़ात की इस्लाह करना।

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