- अल्लाह के रास्ते में निकलना (सहाबा की तरतीब पर)।
- मसरूफात के साथ वक्त निकालना।
- बच्चों को मकतब से जोड़ना।
- मस्जिद को 24 घंटे आबाद रखना।
- पांच कामों की तरतीब: मशवरा, तालीम, घर-घर जाकर दावत, पड़ोस की मस्जिद पर मेहनत, तीन दिन हर महीने।
- 6–13. महाना इज्तिमा, बस्ती से जुड़ाव, घर में दीन के पांच आमाल, इफ्तारी की दावत, खुद से निकलना, दुआओं की एहतिमाम, महीने में निजामी मेहनत।
- मस्जिद की जमाअत से माहाना मशवरा और कामकाज़ी ताल्लुक।
- पूरी बस्ती के अहबाब को दावत और मेहनत से जोड़ना।
- घरों में पाँच आमाल: कुरआन, किताबी तालीम, शिफा, तशकील और मशवरा।
- इफ्तारी की दावत देना।
- हर साथी खुद से निकलकर काम करे।
- दुआओं और अपने आमाल का एहतिमाम।
- हर महीने निज़ामी मेहनत में वक्त लगाना।
- अपनी ज़ात की इस्लाह करना।
Tabligi Jamat ke Kaam
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