- कुल हो अल्लाहु आहद
(कहे, “वह अल्लाह एक है।”) - अल्लाहुस समद
(अल्लाह सबकी ज़रूरत का स्रोत है।) - लम यालिद वलम युलद
(न उसने किसी को जन्म दिया और न ही वह किसी से जन्मा।) - वलम यकु ल्हू कफूवन अहद
(और न ही उसका कोई समान है।)
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सूरह इख्लास का महत्व:
- यह सूरह तौहीद (एकता) का सटीक वर्णन करती है।
- इसे क़ुरान की एक प्रमुख सूरह माना जाता है, जो अल्लाह की एकता और उसकी विशेषताओं को स्पष्ट करती है।
- इसे पढ़ने का बड़ा सवाब है और यह कई धार्मिक पाठों में महत्वपूर्ण है।
यह सूरह मुस्लिम समुदाय में बहुत प्रिय है और इसे अक्सर नमाज में पढ़ा जाता है।
अतिरिक्त जानकारी:
- संख्यात्मक स्थिति: सूरह इख्लास क़ुरान में 112वीं सूरह है।
- आयात की संख्या: इसमें कुल 4 आयात (वर्स) हैं।
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