Fatiha Padhne Ka Aasan tarika

Surah Fatiha Hume har namaz ke shuru me padhna hai. Har kaam ke shuru me surah fatiha padh sakte hai. uske pehle Darud sharif Padhe. Fatiha Rozana Sone se pehle zarur padhe.

  1. दरूदे इब्राहिम – Darood e Ibrahim (3 बार पढ़े)
  2. सुरह काफिरून – Surah Kafiroon (1 बार पढ़े)
  3. सूरए इख़्लास – Surah Ikhlas (3 बार पढ़े)
  4. सूरह फ़लक़ – Surah Falaq (1 बार पढ़े)
  5. सूरह नास – Surah Naas (1 बार पढ़े )
  6. सूरह फ़ातिहा – Surah Fatiha (1 बार पढ़े)
  7. सूरह बक़रह – Surah Baqarah (1 बार पढ़े)
  8. आयत ए खामसह – Aayat-e-Khamsah (1 बार पढ़े)

1. दुरूदे इब्राहीम (Darood e Ibrahim) – 3 बार पढ़ें

  • दुरूदे इब्राहीम एक विशेष दुआ है, जिसमें पैगंबर हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) और उनके परिवार पर अल्लाह की रहमत और सलामती की दुआ की जाती है। इसे नमाज़ के दौरान विशेष रूप से तशह्हुद (आखिरी बैठने की स्थिति) में पढ़ा जाता है।
  • दुरूदे इब्राहीम का पाठ:اللهم صل على محمد وعلى آل محمد كما صليت على إبراهيم وعلى آل إبراهيم إنك حميد مجيد، اللهم بارك على محمد وعلى آل محمد كما باركت على إبراهيم وعلى آل إبراهيم إنك حميد مجيدअनुवाद: हे अल्लाह! हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) और उनके परिवार पर वैसी ही रहमत भेज जैसी तूने हज़रत इब्राहीम और उनके परिवार पर भेजी, निसंदेह तू बहुत प्रशंसनीय और महिमाशाली है। हे अल्लाह! हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) और उनके परिवार को वैसी ही बरकत प्रदान कर, जैसी तूने हज़रत इब्राहीम और उनके परिवार को दी, निसंदेह तू अत्यधिक प्रशंसनीय और महिमाशाली है।

Darood e Ibrahim in English

Allahumma Salle ‘Alaa Muhammadinw Wa’Alaa Aali Muhammadin Kamaa Sallaeta ‘Alaa Ibraaheema Wa’Alaa Aaali Ibraaheema Innaka Hameedum Majeed.
Allahumma Baarik ‘Alaa Muhammadinw Wa’Alaa Aali Muhammadin Kamaa Baarakta ‘Alaa Ibraaheema Wa’Alaa Aaali Ibraaheema Innaka Hameedum Majeed.

2. सूरह काफ़िरून (Surah Kafiroon) – 1 बार पढ़ें

  • यह कुरआन का 109वां अध्याय है, जिसमें इस्लाम के एकेश्वरवाद का स्पष्ट संदेश है। इसमें बताया गया है कि मुसलमान केवल अल्लाह की इबादत करते हैं और दूसरों के साथ अल्लाह की साझेदारी स्वीकार नहीं करते।
  • सूरह काफ़िरून का पाठ:
  • قُلْ يَا أَيُّهَا الْكَافِرُونَ
    لَا أَعْبُدُ مَا تَعْبُدُونَ
    وَلَا أَنتُمْ عَابِدُونَ مَا أَعْبُدُ
    وَلَا أَنَا عَابِدٌ مَّا عَبَدتُّمْ
    وَلَا أَنتُمْ عَابِدُونَ مَا أَعْبُدُ
    لَكُمْ دِينُكُمْ وَلِيَ دِينِ

Surah Kafirun in English

Qul Ya Ayyuhal Kaafiroon
La Aa Budu Ma Ta’budoon
Wala Antum Abidoona Ma Aa’bud
Wala Ana Abidum Ma Abattum
Wala Antum Aabidoona Ma Aa’bud
Lakum Deenukum Waliya Deen

अनुवाद: कह दो, “हे काफिरों! न मैं उसकी इबादत करता हूँ जिसकी तुम इबादत करते हो, और न तुम उसकी इबादत करते हो जिसकी मैं इबादत करता हूँ। न मैं इबादत करने वाला हूँ जिसकी तुम इबादत करते हो, और न तुम उसकी इबादत करने वाले हो जिसकी मैं इबादत करता हूँ। तुम्हारे लिए तुम्हारा धर्म और मेरे लिए मेरा धर्म।”

3. सूरह इख़्लास (Surah Ikhlas) – 3 बार पढ़ें

  • यह कुरआन का 112वां अध्याय है, जिसे “तौहीद” का सार माना जाता है। यह इस्लाम के एकेश्वरवाद और अल्लाह की अनन्यता का सटीक बयान है।
  • सूरह इख़्लास का पाठ:
  • قُلْ هُوَ ٱللَّهُ أَحَدٌ
    ٱللَّهُ ٱلصَّمَدُ
    لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ
    وَلَمْ يَكُن لَّهُۥ كُفُوًا أَحَدٌ

अनुवाद: कह दो, “वह अल्लाह है, जो एक है, अल्लाह सबसे निरपेक्ष है, न वह किसी का पिता है और न वह किसी का पुत्र है, और न ही उसके समान कोई है।”

Surah Ikhlas in English

Qul Huwal Laahu Ahad
Allahus Samad
Lam Yalid Walam Yoolad
Walam Yakul Lahu Kufuwan Ahad

4. सूरह फ़लक़ (Surah Falaq) – 1 बार पढ़ें

  • यह कुरआन का 113वां अध्याय है, जिसे सुरक्षा और बुराई से बचाव के लिए पढ़ा जाता है। इसमें अल्लाह से दुआ की जाती है कि वह हर प्रकार की बुराई और हानि से बचाए।
  • सूरह फ़लक़ का पाठ:
  • قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلْفَلَقِ
    مِن شَرِّ مَا خَلَقَ
    وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ
    وَمِن شَرِّ ٱلنَّفَّـٰثَـٰتِ فِى ٱلْعُقَدِ
    وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ

अनुवाद: कह दो, “मैं सुबह के मालिक (अल्लाह) की शरण में आता हूँ, हर उस बुराई से जो उसने पैदा की है, और अंधेरे के समय की बुराई से, और उन औरतों की बुराई से जो जादू करती हैं, और हर ईर्ष्या करने वाले की बुराई से जब वह ईर्ष्या करता है।”

Surah Falak in English

Qul Aoozu Birabbil Falaq
Min Sharri Ma Khalaq
Wamin Sharri Gasiqin Iza Waqab
Wamin Sharrin Naffasati Fil Uqad
Wamin Sharri Hasidin Iza Hasad

5. सूरह नास (Surah Naas) – 1 बार पढ़ें

  • यह कुरआन का 114वां और आखिरी अध्याय है। इसमें इंसान को अल्लाह से शरण मांगने की दुआ सिखाई गई है, ताकि शैतानी प्रभाव और बुरी ताकतों से बचाव हो।
  • सूरह नास का पाठ:
  • قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلنَّاسِ
    مَلِكِ ٱلنَّاسِ
    إِلَـٰهِ ٱلنَّاسِ
    مِن شَرِّ ٱلْوَسْوَاسِ ٱلْخَنَّاسِ
    ٱلَّذِى يُوَسْوِسُ فِى صُدُورِ ٱلنَّاسِ
    مِنَ ٱلْجِنَّةِ وَٱلنَّاسِ

अनुवाद: कह दो, “मैं इंसानों के मालिक, इंसानों के सच्चे राजा और इंसानों के भगवान की शरण में आता हूँ, उस शैतान की बुराई से जो छिप कर मन में बुरे विचार डालता है, जो इंसानों के दिलों में वसवसा (बुरे विचार) डालता है, चाहे वह जिन्न हो या इंसान।”

6. सूरह फ़ातिहा (Surah Fatiha) – 1 बार पढ़ें

  • यह कुरआन का पहला अध्याय है और इसे कुरआन का सार भी कहा जाता है। इसे रोज़ाना की हर नमाज़ में पढ़ा जाता है।
  • सूरह फ़ातिहा का पाठ:
  • ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ
    ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
    مَـٰلِكِ يَوْمِ ٱلدِّينِ
    إِيَّاكَ نَعْبُدُ وَإِيَّاكَ نَسْتَعِينُ
    ٱهْدِنَا ٱلصِّرَٰطَ ٱلْمُسْتَقِيمَ
    صِرَٰطَ ٱلَّذِينَ أَنْعَمْتَ عَلَيْهِمْ غَيْرِ ٱلْمَغْضُوبِ عَلَيْهِمْ وَلَا ٱلضَّآلِّينَ

अनुवाद: सब प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जो सारे संसारों का पालनहार है। वह बहुत कृपालु, अत्यन्त दयालु है। न्याय के दिन का मालिक है। हम केवल तेरी ही इबादत करते हैं और तुझी से मदद माँगते हैं। हमें सीधे रास्ते पर चला, उन लोगों के रास्ते पर जिन पर तूने अपना इनाम किया, न उन पर जिन पर तेरा क्रोध हुआ और न जो पथभ्रष्ट हुए।

Surah Fatiha in English

Alhamdulillahi Rabbil Aalameen
Arrahmanir Raheem
Maliki Yaumiddeen
Iyyaka Nabudu Waiyyakanastain
Ihdinassiratal Mustaqeem
Siratallazina Anamta Alaihim
Ghairil Maghdubi Alaihim Waladdalleen

7. सूरह बक़रह (Surah Baqarah) – 1 बार पढ़ें

  • सूरह बक़रह कुरआन का सबसे लंबा अध्याय है, लेकिन इसे पूरी तरह पढ़ने के बजाय इसके चुनिंदा हिस्से को पढ़ा जा सकता है। इसका पाठ अल्लाह की रहमत और सुरक्षा का साधन माना जाता है।
  • इसे पढ़ने के दौरान चुनिंदा आयतों को पढ़ा जाता है, विशेष रूप से आयतुल कुर्सी (255वीं आयत) और अंतिम दो आयतें (286वीं आयत)।

Arabic:
الم
ذَٰلِكَ ٱلْكِتَٰبُ لَا رَيْبَۛ فِيهِۛ هُدًى لِّلْمُتَّقِينَ
ٱلَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِٱلْغَيْبِ وَيُقِيمُونَ ٱلصَّلَوٰةَ وَمِمَّا رَزَقْنَٰهُمْ يُنفِقُونَ
وَٱلَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِمَآ أُنزِلَ إِلَيْكَ وَمَآ أُنزِلَ مِن قَبْلِكَ وَبِٱلْءَاخِرَةِ هُمْ يُوقِنُونَ
أُو۟لَٰٓئِكَ عَلَىٰ هُدًۭى مِّن رَّبِّهِمْ ۖ وَأُو۟لَٰٓئِكَ هُمُ ٱلْمُفْلِحُونَ

Transliteration:
Alif-Laaam-Meeem
Zaalikal Kitaabu laa raiba feeh; hudal lilmuttaqeen
Allazeena yu’minoona bilghaibi wa yuqeemoonas salaata wa mimmaa razaqnaahum yunfiqoon
Wallazeena yu’minoona bimaa unzila ilaika wa maaa unzila min qablika wa bil Aakhirati hum yooqinoon
Ulaaa’ika ‘alaa hudam mir rabbihim wa ulaaa’ika humul muflihoon

Translation:
Alif Laam Meem.
This is the Book about which there is no doubt, a guidance for those conscious of Allah.
They believe in the unseen, establish prayer, and spend out of what We have provided for them.
And they believe in what has been revealed to you, [O Muhammad], and what was revealed before you, and of the Hereafter, they are certain.
Those are upon [right] guidance from their Lord, and it is those who will be successful

8. आयत-ए-खामसह (Aayat-e-Khamsah) – 1 बार पढ़ें

  • आयत-ए-खामसह में कुरआन की कुछ विशेष आयतें पढ़ी जाती हैं, जो हिफाज़त और सुरक्षा के लिए पढ़ी जाती हैं। इसमें 5 प्रमुख आयतें शामिल होती हैं:
    • सूरह तौबा (9:51): अल्लाह की इजाज़त के बगैर हमें कोई नुकसान नहीं पहुँचा सकता।
    • सूरह यासीन (36:82): जब वह किसी चीज़ का इरादा करता है, तो उसे बस ‘हो जा’ कहना होता है।
    • सूरह अल-अलाफ (23:118): और कहो, “हे मेरे रब! मुझे क्षमा कर और मुझ पर दया कर, तू सबसे श्रेष्ठ दयावान है।”
    • सूरह अल-हशर (59:21-23): अल्लाह ही सब कुछ का मालिक और ताकतवर है।

Arabic:
وَإِلَٰهُكُمْ إِلَٰهٌۭ وَٰحِدٌۭۖ لَّآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ٱلرَّحْمَـٰنُ ٱلرَّحِيمُ
إِنَّ رَحْمَتَ ٱللَّهِ قَرِيبٌۭ مِّنَ ٱلْمُحْسِنِينَ
وَمَآ أَرْسَلْنَـٰكَ إِلَّا رَحْمَةًۭ لِّلْعَـٰلَمِينَ
مَّا كَانَ مُحَمَّدٌ أَبَآ أَحَدٍۢ مِّن رِّجَالِكُمْ وَلَـٰكِن رَّسُولَ ٱللَّهِ وَخَاتَمَ ٱلنَّبِيِّۧنَۗ وَكَانَ ٱللَّهُ بِكُلِّ شَىْءٍ عَلِيمًۭا
إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَـٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّۚ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

Transliteration:
Wa Ilaahukum Ilaahun Wahid, La Ilaha Illa Huwa Arrahmanur Raheem
Inna Rahmatallahi Qareebum Minal Muhsineen
Wama Arsalnaka Illa Rahmatal lil Aalameen
Ma Kana Muhammadan Abaa Ahadim Mir Rijaalikum Walaakin Rasool Allahi Wa Khataman Nabiyyeen Wa Kaana Allahoo Bi-Kulli Shai’in Aleema
Inna Allaha Wa Mala’ikatahoo Yusalloona Alan Nabiyyi Ya Ayyuhal Lazeena Aamanu Sallu Alayhi Wa Sallimu Tasleema

Translation:
Your God is One God, there is no deity except Him, the Most Merciful, the Most Compassionate.
Indeed, the mercy of Allah is close to the doers of good.
And We have not sent you, [O Muhammad], except as a mercy to the worlds.
Muhammad is not the father of any of your men, but the Messenger of Allah and the Seal of the Prophets.
Indeed, Allah and His angels send blessings upon the Prophet. O you who have believed, ask [ Allah to confer] blessing upon him and ask [ Allah to grant him] peace.

Fatiha Padhne ka Aasan Tarika in English

  1. Darood e Ibrahim – 3 Times
    Purpose: Seeking blessings on Prophet Muhammad (PBUH) and his family.
    • Arabic: اللهم صل على محمد وعلى آل محمد كما صليت على إبراهيم وعلى آل إبراهيم إنك حميد مجيد، اللهم بارك على محمد وعلى آل محمد كما باركت على إبراهيم وعلى آل إبراهيم إنك حميد مجيد
    • Translation:
      O Allah! Send Your mercy on Muhammad and on the family of Muhammad, as You sent Your mercy on Ibrahim and on the family of Ibrahim; indeed You are Praiseworthy, Glorious.
  2. Surah Kafiroon – 1 Time
    Purpose: Affirming monotheism.
    • Arabic:
      قُلْ يَا أَيُّهَا الْكَافِرُونَ … لَكُمْ دِينُكُمْ وَلِيَ دِينِ
    • Translation:
      Say, “O disbelievers, I do not worship what you worship… For you is your religion, and for me is my religion.”
  3. Surah Ikhlas – 3 Times
    Purpose: Declaring the Oneness of Allah.
    • Arabic:
      قُلْ هُوَ ٱللَّهُ أَحَدٌ … وَلَمْ يَكُن لَّهُۥ كُفُوًا أَحَدٌ
    • Translation:
      Say, “He is Allah, [who is] One… Nor is there to Him any equivalent.”
  4. Surah Falaq – 1 Time
    Purpose: Seeking protection from evil.
    • Arabic:
      قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلْفَلَقِ … وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ
    • Translation:
      Say, “I seek refuge in the Lord of daybreak from the evil of that which He created…”
  5. Surah Naas – 1 Time
    Purpose: Protection from hidden dangers.
    • Arabic:
      قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلنَّاسِ … مِنَ ٱلْجِنَّةِ وَٱلنَّاسِ
    • Translation:
      Say, “I seek refuge in the Lord of mankind… from among jinn and among men.”
  6. Surah Fatiha – 1 Time
    Purpose: Essence of prayer, recited in every prayer.
    • Arabic:
      ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ … وَلَا ٱلضَّآلِّينَ
    • Translation:
      All praise is due to Allah, Lord of the worlds… Guide us on the straight path.
  7. Surah Baqarah (Selected Ayahs) – 1 Time
    Purpose: General protection.
    • Arabic:
      الم … ذَٰلِكَ ٱلْكِتَٰبُ لَا رَيْبَ … وَلَا ٱلضَّآلِّينَ
    • Translation:
      Alif Laam Meem. This is the Book about which there is no doubt, a guidance for those conscious of Allah.
  8. Aayat-e-Khamsah – 1 Time
    Purpose: Protection and supplication.
    • Verses Included:
      • Surah Tawba (9:51)
      • Surah Yaseen (36:82)
      • Surah Al-A’raf (7:55)
      • Surah Al-Hashr (59:23)

Recommended Times:

  • Before sleep: Recite Surah Fatiha and any other desired surahs for protection during the night.
  • During prayers: Surah Fatiha is integral to each unit (rak’ah) of prayer.
  • Morning and Evening: Reciting these surahs strengthens spiritual protection and blessings for the day.

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