आज पोस्ट में हम बात करेंगे कि Quran ka Hindi Tarjuma Kisne Kiya यह जानना हमारे लिए बोहोत जरुरी है कि किसने इसका हिंदी में अनुवाद किया। जानें Quran ka Hindi Tarjuma Kisne Kiya और इसको समझें।
. कुरान का पहला तर्जुमा (फारसी ) भाषा में किया गया था :
सबसे पहले, यह जानना जरूरी है कि कुरान का पहला तर्जुमा फारसी भाषा में किया गया था।
यह तर्जुमा हजरत शाह वलीउल्लाह मुहद्दिस देहलवी (रहमतुल्लाह अलैह) ने किया था।
उस समय फारसी एक आम भाषा थी जिसे लोग जानते थे।
यह तर्जुमा खासतौर पर उन लोगों के लिए किया गया था जो कम पढ़े लिखे थे, ताकि घर की औरतें, बच्चे, और आम लोग कुरान का पैगाम समझ सकें।
2. कुरान का तर्जुमा (उर्दू) किसने किया था :
कुरान का पहला उर्दू में तर्जुमा हजरत शाह रफीउद्दीन (रहमतुल्लाह अलैह) ने किया था।
हजरत शाह रफीउद्दीन, हजरत शाह वलीउल्लाह मुहद्दिस देहलवी के बेटे थे।
यह तर्जुमा मस्जिद के एक कमरे में बैठकर किया गया था, जहां उस समय की प्राचीन प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग किया गया।
उस समय तक उर्दू में कोई तर्जुमा मौजूद नहीं था, इसलिए यह एक महत्वपूर्ण कदम था ताकि लोग कुरान का पैगाम आसानी से समझ सकें।
3. कुरान पढ़ने की अहमियत:
- हर मुसलमान को रोजाना कुरान का तर्जुमा पढ़ना चाहिए, चाहे वह एक पन्ना ही क्यों न हो।
- कुरान शरीफ की तिलावत और उसका तर्जुमा पढ़ने से फरिश्ते रहमत नाजिल करते हैं।
- अल्लाह की रहमत भी पढ़ने वाले पर नाजिल होती है।
- तिलावत करने वाले को दुआ की भी जरूरत नहीं रहती, क्योंकि अल्लाह की रहमत उसके साथ होती है।
4. दुआ की अहमियत:
जब अल्लाह को किसी कुरान पढ़ने वाले पर प्यार आता है, तो अल्लाह उसे वह सब कुछ देता है जिसकी उसे जरूरत होती है।
जो आदमी दुआ कर रहा होता है, और जो कुरान पढ़ रहा होता है, उनमें से ज्यादा फायदा कुरान पढ़ने वाले को मिलता है।
इसका कारण यह है कि अल्लाह उस व्यक्ति के बारे में सब जानता है और उसकी जरूरतें पूरी करता है
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FAQ
1. Quran ka Hindi Tarjuma Kisne Kiya ?
कुरान का हिंदी में पहला अनुवाद 19वीं सदी के अंत में, शाह वलीउल्लाह दहलवी ने किया था। उन्होंने इसे अरबी से हिंदी में अनुवादित करके लोगों तक कोशिश की।
2. कुरान का हिंदी भाषा में क्या अर्थ है?
कुरान का हिंदी में मतलब “पढ़ना” होता है। यह शब्द अरबी से आया है और इसका मतलब है कि इसे पढ़ा जाये या इसका अध्ययन किया जाए।
3. कुरान का पहला शब्द क्या है?
कुरान का पहला शब्द “इक़रा” है। यह शब्द सूरह (96:1) से आया है, जिसका मतलब है ‘पढ़ो’ या ‘पढ़ाई करो’। इस शब्द से कुरान की शुरू होता है।